Saturday, 24 March 2018

पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य


पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य

पैर छूना सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि अपने आप में एक विज्ञान है। इस विज्ञान में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायॉलजी तीनों समाहित हैं।
जब हम किसी का पैर छूते है तो यह दिखाता है की हम अपने अहम् से परे होकर किसी की गुरुता , सम्मान और आदर की भावना से चरण स्पर्श कर रहे है. किसी के समक्ष झुकना समर्पण और विनीत भाव को को दर्शाता है
पैर छूने के लिए हम आगे की तरफ झुकते हैं और अपने दाहिने हाथ से बाया पैर और बाएं दाथ से दाहिना पैर छूते हैं। इस प्रक्रिया में हम ऊर्जा चक्र पूरा करते हैं। विज्ञान के अनुसार, हमारे शरीर में सिर की तरफ से ऊर्जा का प्रवेश होकर पैरों की तरफ इसका प्रवाह होता है।

हमारा शरीर जो बहुत सी तंत्रिकाओं से मिलके बना है द्य जो तंत्रिका हमारे मस्तिष्क से शुरू होती है वो हमारे हाथों और पैरों के टिप पे आके खत्म होती है तो पैर छूने की प्रक्रिया में में जब हम अपने फिंगर टिप से उलटे तरफ के पैर छूते हैं यानि बाईं हाथ से दायां पैर और दाएं हाथ से बायां पैर तो इस तरह शरीर का सर्किट पूरा हो जाता है यानि विद्युत चुम्बकीये उर्जा का चक्र बन जाता है और उनकी उर्जा हमारे अन्दर प्रवाहित होने लगती है यानि दो शरीरों की ऊर्जा आपिस में जुड़ जाती हैं और पैर छूने वाला संग्राहक यानि ऊर्जा लेने वाला और पैर छुआने वाला ऊर्जा का दाता बन जाता है 
विज्ञान में सिर को उत्तरी ध्रुव और पैरों को दक्षिणी ध्रुव माना गया है। जब हम बड़ों के पैर हाथों से छूते हैं तो विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का चक्र पूरा हो जाता है। गुरुत्वाकर्षण के नियम के आधार पर शरीर के दक्षिणी ध्रुव यानी पैरों में ऊर्जा का केंद्र बन जाता है।
पैर छूने के लिए झुकना, बैठकर पैर छूना या दंडवत होकर प्रणाम करना अपने आप में एक व्यायाम है। ऐसा करने से शरीर सक्रिय होता है और बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। पैर छूने से शारीरिक कसरत होती है. झुककर पैर छूने, घुटने के बल बैठकर प्रणाम करने या साष्टांग दंडवत से शरीर लचीला बनता है
मस्तिष्क से ही हमारा शरीर संचालित होता है। आगे की तरफ झुकने से दिमाग की नसों में रक्त का संचार बढ़ता है और हम ताजगी का अहसास करते हैं।
बड़े लोगों के दिए हुए आशीर्वाद हमारे सौभाग्य में सहायक बनती हैद्य सही ढंग से अच्छी भावना के साथ पैर छूना चाहिए, जिस से की वह व्यक्ति आपके सम्मान और आदर को अनुभव कर सके उसके मन में आपके प्रति प्रेम और आशीर्वाद की भावनाएं उत्पन्न हो इसलिए हमें निःसंकोच बड़ो के पैर छूना चाहिए और उनके आशीर्वाद को ग्रहण करना चाहिए 








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