Saturday, 24 March 2018

तिलक (चन्दन) लगाने का वैज्ञानिक रहस्य

तिलक (चन्दन) लगाने का वैज्ञानिक रहस्य

हिन्दू धर्म में बहुत सी परम्पराएं हैं। सब परम्पराओं का अपना ही महत्व है। इनमें से एक परम्परा है माथे पर तिलक लगाना, किसी के माथे पर तिलक लगा देखकर मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर टीका लगाने से फायदा क्या है? क्या यह महज दूसरों के सामने दिखावे के मकसद से किया जाता है या फिर तिलक धारण का कुछ वैज्ञानिक आधार भी है? दरअसल, टीका लगाने के पीछे आध्यात्म‍िक भावना के साथ-साथ दूसरे तरह के लाभ की कामना भी होती है. भारत में पूजा के बाद माथे पर तिलक लगाया जाता है और यह परम्परा सदियों से ही चला आ रही है।शायद आपको इसका स्वास्थ्य के लिहाज से महत्व न पता हो। दोनों आंखों के बीच जिस बिंदु पर आप चंदन का तिलक लगाते हैं उसे ‘अग्न’ चक्र कहते हैं। इस स्थान को तीसरी आंख भी कहा गया है। यहां चंदन लगाने से ये सक्रिय हो जाती है।


 तिलक करने से व्यक्त‍ित्व प्रभावशाली हो जाता है. दरअसल, तिलक लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है, क्योंकि इससे व्यक्त‍ि के आत्मविश्वास और आत्मबल में भरपूर इजाफा होता है.
 ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है. लोग शांति व सुकून अनुभव करते हैं. यह कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है.
हल्दी से युक्त तिलक लगाने से त्वचा शुद्ध होती है. हल्दी में एंटी बैक्ट्र‍ियल तत्व होते हैं, जो रोगों से मुक्त करता है.
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, तिलक लगाने से ग्रहों की शांति होती है.
चंदन अपने ठंडक पहुंचाने वाले गुणों के कारण बहुत लोकप्रिय है। ये न सिर्फ त्वचा को ऊपरी फायदा पहुंचाता है बल्कि उसके नीचे की तंत्रिकाओं को भी ठंडा करता है।
गर्मियों में माथे पर चंदन लगाने से आपका पूरा बॉडी सिस्टम ठंडा रहेगा।
 दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित तरीके से होता है, जिससे उदासी दूर होती है और मन में उत्साह जागता है. यह उत्साह लोगों को अच्छे कामों में लगाता है.
इससे सिरदर्द की समस्या में कमी आती है. 
माना जाता है कि चंदन का तिलक लगाने वाले का घर अन्न-धन से भरा रहता है और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है.

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